पंजाब की राजनीति में फिर गर्माई भाजपा-शिअद गठबंधन की चर्चा, शहरी क्षेत्रों में आधार मजबूत करने में जुटा अकाली दल
Talk of a BJP-SAD alliance heats up again in Punjab politics
चंडीगढ़। Talk of a BJP-SAD alliance heats up again in Punjab politics, भारतीय जनता पार्टी और शिरोमणि अकाली दल के बीच पुनः गठबंधन की चर्चाएं तेज हैं। भाजपा की तरफ से लगातार इन चर्चाओं को हवा दी जा रही है। वहीं, शिरोमणि अकाली दल खुल कर इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोल रहा है। गठबंधन की चर्चाओं के बीच शिअद ने शहरी क्षेत्रों में अपने विंगों को मजबूत करने पर जोर देना शुरू कर दिया है।
अभी तक ग्रामीण क्षेत्र पर ही फोकस करने वाली शिअद अब शहरी क्षेत्रों में भी अपना आधार बढ़ाना चाहती है। पार्टी की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट हैं कि अगर 2027 के विधान सभा चुनाव को देखते हुए भाजपा के साथ पुनः गठबंधन हो तो वह शहरी क्षेत्र में भी अपने बढ़े हुए आधार को आगे रख कर सीटों की बात कर सके।
शिअद प्रधान सुखबीर बादल का कहना हैं, आम आदमी पार्टी सरकार की समय सीमा खत्म हो गई है। राज्य कर्जे में डूब चुका है, कानून व्यवस्था नाम की कोई चीज रह नहीं गई हैं। शिरोमणि अकाली दल ही हैं तो इस अंधकार से पंजाब को बाहर ला सकती है। पार्टी अब शहर और गांव की दूरी को भी पाट रही है। इसलिए 70 से अधिक विधान सभा क्षेत्रों में पार्टी के विभिन्न विंगों को सक्रिय कर दिया गया है।
शहरी क्षेत्र में सक्रिय होना समय की जरूरत
पार्टी सूत्र बताते हैं कि शिअद को भाजपा के साथ गठबंधन करने में कोई परेशानी नहीं हैं। क्योंकि यह गठबंधन वर्षों तक चला है। पार्टी यह भी मान रही हैं कि भाजपा अब 23 सीटों वाले पुराने फार्मूले पर आगे नहीं बढ़ेगी। चूंकि भाजपा खुद को शहरी पार्टी कहलाती है। इसलिए अब शिअद भी शहरी क्षेत्र में अपने आधार को मजबूत करना चाहती हैं। यही कारण हैं कि शिअद लगातार स्त्री विंग, एससी-बीसी विंग और यूथ विंग के जरिए शहरी क्षेत्रों में सक्रिय कर रही है।
वहीं, पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि भाजपा लगातार गठबंधन के लिए रास्ता खुला होने की बात कर रही है। केंद्रीय मंत्री हरदीप पुरी कह रहे हैं कि भाजपा के साथ गठबंधन तभी होगा जब वह छोटा भाई बने। भाजपा को यह समझना होगा कि हाल ही में संपन्न हुए जिला परिषद चुनाव में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के बाद शिअद का वोट बैंक सबसे अधिक था।
मालवा में शिअद को मिले अच्छे वोट
मालवा में आप को 34.7 तो शिअद को 27.5 फीसदी वोट मिले। जबकि कांग्रेस को 24.7 और भाजपा 5.5 फीसदी वोट मिले। मालवा वह क्षेत्र हैं जहां से विधान सभा की राह निकलती हैं। इसी प्रकार माझा में आप को 42 तो शिअद को 25.3 फीसदी वोट मिली थी। कांग्रेस को 22.2 तो भाजपा को मात्र 4.8 फीसदी वोट मिले थे।
निकाय चुनाव में शिअद जहां 11 एमसी में चेयरमैन बना रही है तो भाजपा अबोहर और नयागांव में ही अपना चेयरमैन बना पा रही है। वहीं, अगर शिअद भाजपा का गठबंधन होता हैं तो यह पंजाब के हित में होगा। क्योंकि कांग्रेस के बाद आम आदमी पार्टी की सरकार ने पंजाब को 90 के दशक में लाकर खड़ा कर दिया है।